यज्ञ तीन प्रकार के होते हैं:-
राजस , तामस , और तानस ,
राजस यज्ञ सात्विक होता है, जिसे समस्त लोग कर सकते हैं, तामस यज्ञ सात्विक नहीं होता है
तथा
उसमें ड़लने वाली आहुति भी सात्विक नहीं होती हैं, तथा तानस यज्ञ जिसे तांत्रिक क्रिया
से
किया जाता है , इस यज्ञ में भी सात्विक आहुति नहीं
ड़लती,
राजस यज्ञ-
राजस यज्ञ हमें सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है तथा नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है ,
राजस यज्ञ हम श्री ( लक्ष्मी ) प्राप्ति के लिए , वास्तुदोष शांति के लिए ,
नव ग्रहों की शांति के लिए , रुद्राभिषेक के लिए , श्रीमद्भागवत कथा एवं राम कथा आदि के
लिए
करते हैं जिसका फल हमें मंगलमय आनंद स्वरूप में प्राप्त होता है।
तामस यज्ञ-
तामस यज्ञ सकारात्मकता को नष्ट करके नकारात्मकता को प्रदान करता है , तथा इस यज्ञ में
ड़लने
वाली समस्त आहुति सात्विक नहीं होती हैं तथा इस यज्ञ को मारण क्रिया के लिए प्रयोग किया
जाता है।
तानस यज्ञ-
तानस यज्ञ तंत्र क्रिया द्वारा किया जाता है इस यज्ञ को जिंद , मसान , प्रेत , श्मशान
भैरवी
, आदि की सिद्धि के लिए किया जाता है , इस यज्ञ की भी आहुति सात्विक नहीं होती हैं।
अतः सर्वोपरी एक मात्र राजस यज्ञ ही है जिसे हम अपनी नित्य की दिन चर्या में धारण करके यश , वैभव , एवं सृष्टि का पूर्ण सुख प्राप्त कर लेता है ।।
।। जय माता दी ।।
।। जय माता दी ।।